PKVY: किसानों के अकाउंट में सीधा जाएगा 50000 रुपए, नहीं करना पड़ेगा अब कोई भी इंतज़ार

परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत किसानों को जैविक खेती करने के लिए 50000 रुपए का अनुदान दिया जाता है.


रासायनिक उर्वरकों के चलते मिट्टी की गुणवत्ता (Soil Quality) को भारी क्षति पहुंची है. इसी कारण किसानों की उपज में साल दर साल कमी आ रही है, जो देश के लिए एक गंभीर विषय है, इसलिए किसानों को इससे बाहर निकालने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक ऐसी योजना चलाई जा रही है, जिससे वह जैविक खेती (Organic Farming) को जल्द से जल्द अपना सके. इस योजना का नाम परंपरागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana) है जिसका मकसद किसानों को रसायनमुक्त खेती की ओर ले जाना है.

जैविक खेती का लाभ

इस योजना के तहत किसानों को अधिक अनुदान भी दिया जा रहा है, ताकि उन्हें जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. इससे सबसे अधिक फायदा उनको अपनी उपज बढ़ाने में मिलेगा और आय में भी वृद्धि हो सकेगी. यदि आप Paramparagat Krishi Vikas Yojana में रूचि रखते हैं, तो आप नीचे लेख में सारी जानकारी प्राप्त करने के बाद सीधा आवेदन भी कर सकते हैं.

परंपरागत कृषि विकास योजना में अनुदान

  • आपकी जानकारी के लिए बता दें कि परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी.

  • यह अनुदान किसानों को बेहतर उपज और मार्केटिंग (Marketing) के लिए दिया जाता है.

  • इस योजना के तहत किसानों को 3 साल में 50000 रुपए का अनुदान मुहैया करवाया जाता है.

  • पहले साल में 31000 रुपए सीधे ट्रांसफर किया जाता है, ताकि किसान जैविक उर्वरक (Organic Fertilizer), जैविक कीटनाशक (Organic Pesticide) और उत्तम बीजों (High Quality Seeds) की व्यवस्था कर सकें.

  • बाकि बचे 8800 आखिर के 2 साल में दिए जाते हैं, जिसका इस्तेमाल किसान प्रसंस्करण (Processing) , पैकेजिंग (Packaging), मार्केटिंग (Marketing) सहित कटाई की व्यवस्था के लिए करते हैं.

किसानों की आय होगी दोगुनी

इस योजना का उद्देश्य किसानों के निवेश को कम करने के साथ उनकी आय को दोगुना करना है. ऐसे में किसानों की यह जिम्मेदारी होती है कि वह अनुदान का दुरुपयोग आ कर के उसका सदुपयोग करें.

परंपरागत कृषि विकास योजना की पात्रता

  • लाभार्थी भारत का निवासी होना चाहिए.

  • आवेदक सिर्फ किसान ही होना चाहिए.

  • आवेदक की आयु 18 वर्ष से ज्यादा होनी चाहिए.

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